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'शराब माफियाओं पर लगाम लगाने वाला अफसर खुद करोड़ों की संपत्ति का मालिक?' बिहार में एक्साइज इंस्पेक्टर के ठिकानों पर EOU की बड़ी रेड


बिहार में शराबबंदी कानून को प्रभावी ढंग से लागू कराने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर होती है, उन्हीं में से एक अधिकारी अब आय से अधिक संपत्ति के गंभीर आरोपों के घेरे में आ गए हैं। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की बड़ी कार्रवाई ने पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल मचा दी है। सीवान में तैनात एक्साइज इंस्पेक्टर अंकेश कुमार गोंड के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में पटना, मुंगेर और सीवान स्थित कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। जांच एजेंसी का दावा है कि प्रारंभिक जांच में उनकी वैध आय की तुलना में लगभग 201.97 प्रतिशत अधिक संपत्ति के प्रमाण मिले हैं। हालांकि मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

EOU की बड़ी कार्रवाई से मचा हड़कंप

आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने गुरुवार को विशेष न्यायालय, निगरानी, पटना से सर्च वारंट प्राप्त करने के बाद एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी शुरू की। कार्रवाई सीवान में स्थित उत्पाद विभाग के कार्यालय से लेकर पटना के दानापुर और मुंगेर में स्थित निजी व पारिवारिक परिसरों तक की गई।

EOU के अनुसार, प्रारंभिक जांच में पाया गया कि अंकेश कुमार गोंड ने अपनी ज्ञात और वैध आय की तुलना में लगभग 2 करोड़ 38 लाख रुपये की अतिरिक्त संपत्ति अर्जित की है। जांच एजेंसी का दावा है कि यह संपत्ति उनकी घोषित आय से लगभग 201.97 प्रतिशत अधिक है। इसी आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की गई।

करोड़ों की संपत्ति पर जांच एजेंसियों की नजर

जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, अंकेश कुमार गोंड ने मुंगेर में लगभग 1.40 करोड़ रुपये मूल्य का एक व्यावसायिक भूखंड खरीदा। जांच एजेंसी का कहना है कि इस खरीद में किसी प्रकार के बैंक ऋण का रिकॉर्ड नहीं मिला है, जिससे धन के स्रोत को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

इसके अलावा पटना के दानापुर इलाके में लगभग 80 लाख रुपये की लागत से निर्मित तीन मंजिला मकान भी जांच के दायरे में है। अधिकारियों का कहना है कि मकान के निर्माण में हुए खर्च और आय के स्रोतों का मिलान किया जा रहा है।

कई महंगी गाड़ियां भी जांच के घेरे में

EOU की जांच में यह भी सामने आया है कि अंकेश कुमार गोंड और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर कई वाहन पंजीकृत हैं। जांच एजेंसी ने अब तक आठ वाहनों का विवरण जुटाया है।

इन वाहनों की खरीद में प्रयुक्त धन के स्रोत की भी जांच की जा रही है। इसके अलावा बैंक खातों, सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF) और अन्य निवेश योजनाओं में जमा लगभग 54 लाख रुपये की राशि की भी जांच की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक निवेश के दस्तावेजों का मिलान आयकर रिकॉर्ड और सेवा अवधि के दौरान अर्जित वैध आय से किया जाएगा।

मुंगेर में तीन स्थानों पर एक साथ रेड

EOU की दो अलग-अलग टीमों ने मुंगेर जिले में एक साथ तीन स्थानों पर छापेमारी की।

इनमें शामिल थे—

  • लल्लू पोखर स्थित पत्नी पूनम कुमारी के नाम दर्ज मकान

  • चंदनबाग स्थित पैतृक आवास

  • नया टोला स्थित बहन सुलेखा देवी का घर

करीब साढ़े चार घंटे तक चली इस कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने जमीन के कागजात, बैंक रिकॉर्ड, निवेश संबंधी दस्तावेज और अन्य वित्तीय अभिलेख जब्त किए।

जैसे ही छापेमारी की खबर इलाके में फैली, आसपास बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए और पूरे क्षेत्र में कार्रवाई चर्चा का विषय बन गई।

स्कॉर्पियो वाहन भी हुआ जब्त

छापेमारी के दौरान एक स्कॉर्पियो वाहन भी बरामद किया गया, जिसे जांच के लिए जब्त कर लिया गया।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अंकेश कुमार गोंड कथित रूप से बुधवार देर रात इसी वाहन से मुंगेर पहुंचे थे। हालांकि गुरुवार सुबह कार्रवाई शुरू होने से पहले उनके वहां से चले जाने की चर्चा रही।

हालांकि आर्थिक अपराध इकाई ने आधिकारिक रूप से यह पुष्टि नहीं की है कि अंकेश कुमार गोंड फरार हैं। एजेंसी ने केवल इतना कहा है कि जांच जारी है और सभी तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है।

पांच ठिकानों पर एक साथ चली कार्रवाई

EOU की कार्रवाई केवल मुंगेर तक सीमित नहीं रही। टीमों ने एक साथ कुल पांच स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया।

इनमें शामिल हैं—

  • दानापुर स्थित निजी आवास

  • मुंगेर का पैतृक घर

  • निर्माणाधीन व्यावसायिक भवन

  • सीवान स्थित उत्पाद विभाग कार्यालय

  • चित्रगुप्त नगर स्थित किराये का आवास

इन सभी स्थानों से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बैंक दस्तावेज, जमीन के कागजात और निवेश संबंधी रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। अब विशेषज्ञ इन दस्तावेजों का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।

सरकारी सेवा वाला परिवार भी जांच के दायरे में

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अंकेश कुमार गोंड मूल रूप से झारखंड के रहने वाले हैं।

उनके पिता विजय कुमार गोंड भारतीय रेलवे के जमालपुर रेल कारखाना में सेक्शन इंजीनियर के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।

परिवार के अन्य सदस्य भी सरकारी सेवा में कार्यरत बताए जाते हैं—

  • एक भाई मुंगेर प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में लेखपाल हैं।

  • बहन सरकारी शिक्षिका हैं।

हालांकि किसी भी पारिवारिक सदस्य पर फिलहाल कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ है। जांच एजेंसी केवल संपत्तियों और उनके स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज

EOU ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।

जांच एजेंसी का कहना है कि अभी यह केवल प्रारंभिक चरण है। जब्त किए गए दस्तावेजों, बैंक खातों, निवेश और संपत्तियों का मूल्यांकन किया जाएगा। यदि जांच में बेनामी संपत्ति, फर्जी निवेश या किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से संपत्ति अर्जित करने के प्रमाण मिलते हैं, तो मामले का दायरा और बढ़ सकता है।

वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में जांच

इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व वरिष्ठ डीएसपी संजय पांडेय और डीएसपी विजय कुमार गुप्ता कर रहे हैं।

अधिकारियों के अनुसार, बैंक खातों में हुए लेन-देन, निवेश के स्रोत, संपत्ति खरीद के समय किए गए भुगतान तथा वित्तीय रिकॉर्ड का बारीकी से विश्लेषण किया जाएगा।

इसके अलावा यह भी जांच की जाएगी कि कहीं सरकारी पद का दुरुपयोग कर अवैध आर्थिक लाभ तो प्राप्त नहीं किया गया।

शराबबंदी कानून के बीच बड़ा सवाल

बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है और इस कानून को प्रभावी बनाने की जिम्मेदारी उत्पाद विभाग पर है। ऐसे में इसी विभाग के एक अधिकारी पर आय से अधिक संपत्ति के आरोप लगना प्रशासन के लिए भी गंभीर चुनौती माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं रहेगा, बल्कि विभागीय पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

आगे क्या होगा?

अब EOU जब्त दस्तावेजों की फोरेंसिक और वित्तीय जांच करेगी। बैंक खातों का विश्लेषण, संपत्तियों का मूल्यांकन और निवेश के स्रोतों की पुष्टि की जाएगी। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और संपत्ति जब्ती जैसी प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।

हालांकि जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है। ऐसे में जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और सक्षम न्यायालय कोई निर्णय नहीं देता, तब तक अंकेश कुमार गोंड के खिलाफ लगे आरोपों को केवल आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

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